आमी मन्दिर बिहार राज्य के छपरा जिले में पटना मुख्य मार्ग पर स्थित दिघवारा के पश्चिम में स्थित गांव आमी में स्थित प्राचीन शक्ति पीठ है। मन्दिर के पीठासीन देवता के रूप में देवी पार्वती, गौरी दुर्गा आदि नामों से पुकारी जाने वाली आदि शक्ति माँ अम्बिका भवानी है, जिनका सौम्य स्वरुप अपने भक्तों को एक विचित्र अनुभूति प्रदान करते हुए अपनी ओर आकृष्ट करता प्रतीत होता है। देवी के इस दुर्लभ मन्दिर के नाम के कारण गांव का नाम भी आमी गांव पड़ा तथा इस देवी के इस दुर्लभ शक्ति पीठ को अम्बा अस्थान के नाम से सम्बोधित किया जाता है।
पुराणों में वर्णित आमी मन्दिर (Aami Temple Mentioned in Puranas)
देवी के सबसे प्रामाणिक ग्रन्थ दुर्गा सप्तशती के अनुसार सांसारिक मोह के बन्धनों में बंधे राजा सुरथ और समाधि नामक वैश्य जब भटकते हुए ऋषि मेघा के आश्रम पहुंचे और वहां उन्होंने ऋषि के मुख से देवी महामात्य का श्रवण किया। जिसके बाद वे ऋषि की सलाह पर नदी के किनारे देवी से आशीर्वाद प्राप्त के उद्देश्य को मन में लिए देवी की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर कठोर तपस्या करने लगे। तपस्या के फलस्वरूप उन्हें देवी अम्बिका के दर्शन प्राप्त हुए तथा मनोवांछित फल की प्राप्ति हुई। राजा सुरथ और समाधि नामक वैश्य द्वारा बनाई गयी यही मिट्टी की प्रतिमा आज भी मन्दिर के गर्भ गृह में स्थित है तथा भक्त उसी प्रतिमा की पूजा करते है।
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आमी मन्दिर |
शिवपुराण में उस समय का वर्णन है जब देवी सती अपने पिता दक्ष प्रजापति के द्वारा किये जा रहे यज्ञ जिसमे भगवान शिव आमंत्रित नहीं थे में पहुँचती है तथा अपने पिता द्वारा अपने पति का अपमान सहन न कर पाने के कारण स्वयं को उस यज्ञ अग्नि में भस्म कर लेती है। आमी जिसका अर्थ है - यज्ञ स्थल, ऐसी अग्नि में भस्म होते समय देवी सती के शरीर की भस्मयुक्त अस्थी यज्ञ स्थल आमी में ही रह गयी थी। इसलिए यह स्थल सिद्ध पीठ अम्बिका स्थान अर्थात आमी के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
क्या है दिघवारा?( What Is Dighwara?)
वर्तमान छपरा शहर का दिघवारा जहा आमी मन्दिर स्थित है के विषय में वर्णन प्राप्त होता है की यह क्षेत्र ब्रह्मा के पुत्र दक्ष प्रजापति के अधीन था। शिवपुराण में वर्णित दक्ष प्रजापति ने जो यज्ञ करवाया था। यज्ञशाला में प्रवेश के लिए एक भव्य द्वार जिसका नाम "दिघ द्वार" रखा गया था, निर्माण करवाया गया। कालन्तर में यहीं दिघ द्वार को दिघवारा के नाम से जाना जाने लगा।
आमी मन्दिर का मुख्य आकर्षण (Main Attractions of Ammi Temple)
आमी देवी मन्दिर एक पौराणिक मन्दिर है। जहां देश के कोने कोने से लोग भगवती के दर्शन के लिए पहुंचते है। यहाँ आने वाले भक्तों में इस मन्दिर परिसर में और उसके आसपास मौजूद दर्शनीय बिन्दु भी एक जिज्ञासा का केन्द्र बनते है।
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देवी की मूर्ति जिसका निर्माण राजा सुरथ और वैश्य समाधि द्वारा किया गया Image Source - Google By Temple purohit |
परिसर में मौजूद चमत्कारी कुआँ (Magical Well in Ammi Temple)
आमी मन्दिर के परिसर में मन्दिर के समीप ही एक सुन्दर बगीचा मौजूद है जिसमे एक प्राचीन गहरा कुआँ है। स्थानीय निवासियों और मन्दिर के पुजारियों के अनुसार इस कुआँ का जल कभी भी नहीं सूखता है।
आमी मन्दिर का यज्ञकुण्ड (Ammi Temple's Yagyakund)
आमी मन्दिर के परिसर में एक यज्ञकुण्ड है। जिसे इस मन्दिर में मूर्ति के बाद माना जाने वाला मुख्य आकर्षण है। इस यज्ञ कुण्ड में आने वाले भक्तों द्वारा जल अर्पित किया जाता है जो अपने आप ही अदृश्य हो जाता है। आने वाले दर्शनालु भक्त व मन्दिर के पुजारी इसे अम्बिका भवानी का चमत्कार मानते है।
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आमी मंदिर का यज्ञकुण्ड |
आमी मन्दिर की मुख्य प्रतिमा (Main Idol of Ammi Temple)
पूर्व पुरातत्व निदेशक डॉक्टर प्रसाद के अनुसार यह क्षेत्र पौराणिक क्षेत्र है जिस पर दक्ष का आधिपत्य था तथा शिव शक्ति का समन्वय स्थल है। मन्दिर गर्भगृह में उपस्थित देवी अम्बिका की मिट्टी की प्रतिमा पासाण काल के पूर्व प्रागैतिहासिक काल की है। मिट्टी की यह प्रतिमा पूरे विश्व में एकमात्र प्रतिमा है जिसका निर्माण पूरी तरह से मिट्टी से किया गया है।
आमी मन्दिर से जुड़े रोचक तथ्य (Interesting Facts about Ammi Temple)
🔰शक्ति मत में देवी पूजा में समकोणीय त्रिभुज के आकार की संरचना का उतना ही महत्व है जितना भगवान विष्णु की पूजा में सालिग्राम और भगवान शिव की पूजा में शिवलिंग का। आमी मन्दिर के विषय में मान्यता है की यदि मन्दिर को एक केन्द्र माना जाये और एक काल्पनिक रेखा के द्वारा त्रिभुज का निर्माण किया जायें, तो त्रिभुज के तीन शीर्ष बिन्दुओं पर बाबा वैद्यनाथ, बाबा विश्वनाथ और नेपाल में स्थित भगवान पशुपतिनाथ के मन्दिर आते है जिनकी इस त्रिभुजाकार केन्द्र ( आमी मन्दिर ) से सामान दूरी पर स्थित है।
🔰आमी अम्बिका मन्दिर के गर्भगृह में स्थित देवी विग्रह एक मात्र मिट्टी की प्रतिमा है जिसमें देवी को स्न्नान आदि कराने के बाद भी आज तक मूर्ति का क्षय नहीं हुआ है।
🔰मन्दिर का निर्माण एक किले की संरचना में किया गया है। जो तीन तरफ से गंगा नदी से घिरा हुआ है। चूंकि सारण एक बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है, परन्तु आज तक कभी भी मानसून के समय जलस्तर कितना भी बढ़ जाये देवी गंगा किले को नहीं छूती है।
🔰१९७३ में जब बिहार सरकार के पुरातत्व विभाग के निदेशक डॉक्टर प्रसाद के नेतृत्व में बने दल ने इस स्थल की जांच की तो उन्होंने पाला राजवंश के काल की कुछ ईंट प्राप्त हुई थी।
आमी मन्दिर में दर्शन का समय (Timing of Ammi Temple)
आमी मन्दिर भक्तों के लिए प्रातः ९:०० बजे से अपराह्न १२:३० बजे था तथा सायं ५:०० बजे से रात्रि ८:०० बजे तक खुला रहता है। जिसमें आने वाले भक्तों को देवी के दर्शन के साथ ही साथ पूजा की अनुमति प्राप्त होती है।
आमी मन्दिर में मनाये जाने वाले समारोह (Celebrations which are Celebrated in Ammi Temple)
महाशिवरात्रि (Maha Shivratri)
चूंकि मान्यता है इसी स्थल पर भगवान शिव और आदिशक्ति देवी सती का विवाह हुआ था। इसलिए महाशिवरात्रि के दिन यहाँ भक्तों का ताँता लगा रहता है। इस दिन शिव बारात मुख्य आकर्षण का केन्द्र होता है, जिसमें एक तरफ से एक तैयार दुल्हन और दूसरी तरफ से एक दूल्हा आता है तथा पारम्परिक विवाह के कार्यक्रम को दर्शाया जाता है। यह उत्सव पूरे दिन और रात्रि तक चलता है।
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मंदिर के बाहर लगने वाला मेला |
नवरात्रि (Navratri)
आमी मन्दिर से जुडी हुई एक मान्यता है की जो यहाँ पर पूजा और अर्चना करते है उनकी सारी मनोकामनाएं देवी अम्बिका द्वारा पूरी की जाती है। इसलिए नवरात्रि के पावन अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु यहाँ दिव्य कृपा प्राप्त करने आते है।
आमी मन्दिर दर्शन के लिए कैसे जाये ? (Being In Ammi Temple)
हवाई जहाज द्वारा (By Air)
रेल द्वारा (By Train)
सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन आमी में स्थित स्वयं का रेलवे स्टेशन है। जहां से मन्दिर की दूरी २.५ किमी के लगभग है।
सड़क मार्ग द्वारा (By Road)
आमी गांव राष्ट्रीय राजमार्ग १९ ( NH १९ ) के किनारे स्थित है जो उत्तर प्रदेश और बिहार को विभिन्न शहरों से जोड़ता है।
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